भगत सिंह: दादा जी के नाम एक और पत्र

लाहौर, 14 नवम्बर, 1921

मेरे पूज्य दादा साहब जी,
नमस्ते।

अर्ज़ यह है कि इस जगह खैरियत है और आपकी खैरियत श्री परमात्मा जी से नेक मतलूब हूँ। अहवाल ये है कि मुद्दत से आपका कृपा-पत्र नहीं मिला। क्या सबब है? कुलबीर सिंह, कुलतार सिंह की खैरियत से जल्दी मुत्तला फ़रमायें। बेबे साहबा अभी मेराँवाली से वापस नहीं आयीं। बाक़ी सब खैरियत है।
(कार्ड की दूसरी तरफ़)
माता जी को नमस्ते। चाची साहबा को नमस्ते। मंगू चमार अभी तक तो नहीं आया। मैंने एक पुरानी किताब मोल ली थी, जोकि बहुत सस्ती मिल गयी थी।
(कार्ड की लाइनों के बीच उलटे रुख)
आजकल रेलवे वाले हड़ताल की तैयारी कर रहे हैं। उम्मीद है कि अगले हफ्ते के बाद जल्द शुरू हो जायेगी।

आपका ताबेदार,
भगतसिंह